भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

एमन समाज कबे गो सृजन हबे (बाउल) / बांग्ला

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

एमन समाज कबे गो सृजन हबे
ये दिन हिन्दु-मुसलमान बौद्ध-खृष्टान जाति-गोत्र नाहि रबे।
शोनाय लोभेर बुलि
नेबे ना केओ काँधेर झुलि,
इतर आतरफ बलि
दुरे ठेले ना देबे।।
आमिर फकीर हये एक ठाँइ
सबार पाओना पाबे सबाइ,
आशरफ बलिया रेहाइ,
भवे केओ येनाहि पाबे।।
धर्म-कुल-गोत्र-जातिर,
तुलबे ना गो जिगिर,
केंदे बले लालन फकिर
केबा देखाये देबे।