भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ओ गेंदे के फूल! / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

केसरिया पगड़ी ये लाए कहाँ से?
सच-सच बताना
ओ गेंदे के फूल!

हाट से लाए,
या मेले से लाए,
मुफ़्त में लाए,
या पैसे से लाए!
पैसे भी इतने कमाए कहाँ से?
सच-सच बताना
ओ गेंदे के फूल!

चम्पा ने देखा,
चमेली ने देखा,
रात की रानी,
नवेली ने देखा।
रूप के गहने चुराए कहाँ से?
सच-सच बताना
ओ गेंदे के फूल!