भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ओ मेघा रे, मेघा रे / संतोषानन्द

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ओ मेघा रे, मेघा रे

ओ मेघा रे, मेघा रे मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेश बरसा रे |
मेरे गम की तू दवा दे
आज तू प्रेम का संदेश बरसा रे |

चलो और दुनिया बसाएँगे हम-तुम
यह जन्मों का नाता निभाएँगे हम-तुम
ओ मेघा रे, मेघा रे हमको तू दुआ दे
आज तू प्रेम का संदेश बरसा रे

ओ मेघा रे मेघा रे……


फ़िल्म : प्यासा सावन (1981)