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करत बिहार बाग में डेरा / संत जूड़ीराम

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करत बिहार बाग में डेरा।
पाँच पचीसक शीश पर डोलत और सकल बनफूल घनेरा।
आद अंत सुर संत सकाने बास आस मन फिरत न फेरा।
फूले कमल कामरस डोलत उड़त भौंर तहं लेत बसेरा।
दुःख-सुख सहित बाग के भीतर समुझ बिना फिर-फिर अरुझेरा।
जूड़ीराम जाग जल जहड़ो बिनु गुरु शबद सेध नहिं हेरा।