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कर्ण-नौमा सर्ग / रामधारी सिंह ‘काव्यतीर्थ’

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अंगनरेश कर्ण के शासन

होलै कर्ण अंग नरेश
जागी पड़लै अंग प्रदेश।

विशाल सेना शौर्य महान
करलकै कर्ण प्रस्थान।

पृथ्वी विजय के छेलै अभियान
देखी केॅ राजा सब के काँपै परान

पहिनें द्रुपद-राजधानी जीत
तबेॅ हिमालय तराई के राजा पराजित।

पूरब तरफें सेना चललै
कलिंगे, पौण्ड, बंग मिललैं
मथिलो, मगध, भी नहियें छुटलै
कर्ण अधीन सब होइये गेलै।

दक्षिण राजोॅ पर विजय अभियान
बहुते राजा के मिटलै शान।

मतर रुक्मी के साथें युद्ध घमासान
हारी-पारी के रुक्मी कर्ण के करेॅ सम्मान।

जब दक्षिण के राजा कर्णाधीन भेलै
विशाल सेना पश्चिम दिशा बढ़लै।

यवन व बर्बर राजा परास्त होय गेलै
सौंसे भारत कर्ण के अधीन भेलै।


द्रोण के अंत

1. रात्रि समय
मशाल जलै छेलै
सेना एकट्ठा !
कर्ण घटोत्कच में
युद्ध; कुरुक्षेत्रा में।

2. बाण बौछार
कौरव सेना वध
प्रलय होलै।
दुर्योधन काँपलै
कर्णें ‘शक्ति’ छोड़लकै।

3. घटोत्कच तेॅ
धड़ाम सें गिरलै
पांडव दुःखी।
द्रोण बाण बौछार
पाण्डव सेना मार।

4. द्रोण परास्त तेॅ
धार्मिक युद्ध सें नै
कृष्ण बोललै।
कुचक्र रचला सेॅ
सुत मरे सूचना सेॅ।

5. अर्जुन सन्न
असत्य पथ जान
छै नापसन्द।
युधिष्ठिर तैयार
पाप केॅ सिर धार।

6. सुग्रीव लेली
रामें बाली के वध
करै अधर्म।
लेलकै पाप भार
जेना सिरपर धार।

7. युधिष्ठिरें भी
लेलकै पाप भार
धार कपाड़।
पांडव सुरक्षा लेॅ
द्रोणाचार्य मारै लेॅ।

8. नर या गज
अश्वत्थामा मराय
मन्द सुनाय।
शंखनाद अतुल
द्रोणाचार्य व्याकुल।

9. शस्त्रास्त्रा फेंक
आसन लै जमाय
धियान मग्न।
धृष्टद्युम्न प्रहार
द्रोण स्वर्ग सिधार।