Last modified on 4 जनवरी 2011, at 00:46

कर दिया है तिमिर ने दुर्बल बहुत / लाला जगदलपुरी

अल्प-जीवी पुष्प इतना कर गया,
सूर्य को शबनम पिला कर झर गया ।

साथ मेरे सिर्फ़ सन्नाटा रहा,
चाँद सिरहाने किरन जब धर गया ।

कर दिया है तिमिर ने दुर्बल बहुत,
मन अभागा रौशनी से डर गया ।

लहलहाई ज़िन्दगी की क्यारियाँ,
किंतु सोने का हिरण सब चर गया ।

हृदय तड़पा तो छलक आए नयन,
स्नेह सारा हृदय हेतु निथर गया ।

क्या करे कोई सुराही क्या करे,
यदि किसी के कण्ठ में विष सर गया ।