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कल रात दूर कही कोई / इवान बूनिन

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»  कल रात दूर कही कोई

कल रात दूर कहीं कोई गाता रहा देर तक
अँधेरे में जूतियाँ कोई चटकाता रहा देर तक
दूर वहाँ पर गूँजती रही एक उदास आवाज़
बज रहा था बीते सुख और आज़ादी का साज

खिड़की खोली मैंने और गीत वह सुनता रहा
सो रही तू...... मैं रूप तेरा गुनता रहा
वर्षा से भीगी थी रई, खेत महक रहा था
ठंडी और सुगंधित रात, मन बहक रहा था

उस पीड़ित कंपित स्वर ने रुह को जगा दिया
पता नहीं क्यों, उसने मुझको उदास बना दिया
मन में मेरे आया तुझ पर तब वैसा ही लाड़
कभी जैसे तू करती थी मुझसे जोशीला प्यार

(1889)
मूल रूसी भाषा से अनुवाद : अनिल जनविजय