भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कविनामा-2(राजेश जोशी के लिए) / नीलाभ

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इमली की तरह है मेरा दूसरा संगाती
एक विराट झंखाड़
मानो झाड़ियों की दैत्याकार प्रजाति का वंशज

चुहल-भरी चुटकी काटने
और सनसनी पैदा करने वाले फल
वैसी ही प्रकृति और स्वभाव है इसका
थोड़ा-सा काइयाँपन भी जो इमली में ही हो सकता है

लेकिन इसकी विराट काया पर नन्हीं-नन्हीं पत्तियों का
मज़ाक न उड़ाइएगा
वरना पलट कर यह कह सकता है आपसे
बड़े सूरमा हो तो लो मेरी पत्तियों पर डंड पेल कर तो दिखाओ।