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कवि के काम / अरुण कुमार निगम

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कविता गढ़ना काम हे, कवि के अतकी जान,
जुग परिबर्तन ये करिस, बोलिन सबो सियान।
बोलिन सबो सियान, इही दिखलावे दरपन,
सुग्घर सुगढ़ बिचार, जगत बर कर दे अरपन।
कबिता - मा भर जान, सदा हे आगू बढ़ना,
गोठ 'अरुन' के मान, मयारू कबिता गढ़ना।