भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कस्बाई अस्पताल में / ब्रजेश कृष्ण

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

निस्पृह ऊंची दीवारें
लाठी टेककर चलता हुआ बूढ़ा पंखा
कस्बे के टोपी आदमियों से
गपशप करता थुलथुल डाक्टर
और लम्बे तटस्थ बरामदे में
भिनभिनाते मरीज और मक्खियां।

मैं बगल में बैठी
पीली लड़की की आंखों में शिकायत
और पहुंच से ऊपर टंगी
शिकायत पेटी में उसकी आंखें देखता हूं।

और सामने के ठूंठ हो गए पेड़ में
तेजी से समा जाता हूं।