पँवारी लोकगीत ♦ रचनाकार: अज्ञात
कहाँ सी मंगत ऊबज्यो रे भाई
कहाँ लियो रे अवतार रामा
बिजोड़ो दे रे भाई।। कहाँ सी...
सरग सी मंगत ऊबज्यो रे भाई
धरती लियो अवतार रामा
बिजोड़ो दे रे भाई।। कहाँ सी...
मंगत की माय नऽ माँडा पोयो रे भाई
मंडल नऽ दी झकाझोर रामा
बिजोड़ो दे रे भाई।। कहाँ सी...
मंडल नऽ दी झकाझोर रामा
बिजोड़ो दे रे भाई।। कहाँ सी...