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कहीं पे हुस्न से गर कोई भूल हो जाए / सत्यवान सत्य

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कहीं पर हुस्न से गर कोई भूल हो जाए
नहीं ये लगता कि उसको कुबूल हो जाए

किया है वस्ल का वादा अभी अभी उसने
दुआ मेरी न कहीं ये फुजूल हो जाए

तेरी ही रूह से मिल जाए गर ये रूह मेरी
बदन मेरा तेरे पाँवों की धूल हो जाए

असर आ जाए अगर मेरी भी दुआओं में
यक़ीं है मुझको वह पत्थर भी फूल हो जाए

अगर वह एक नज़र डाल दे फ़क़त मुझ पर
मेरे भी इश्क़ की उजरत वसूल हो जाए

अजाब से हैं लगें काँपने जमीनो फलक
तेरे करम से कोई अब रसूल हो जाए

उसूल था जो मुहब्बत का उस ज़माने में
अब इस ज़माने में भी वह उसूल हो जाए