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क़ाफ़िले से अलग चले हम लोग / विकास शर्मा 'राज़'

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क़ाफ़िले से अलग चले हम लोग
सुर्ख़ियों में बने रहे हम लोग

देखिये, कब तलक रहेंगे साथ
एक-से हैं मिज़ाज के हम लोग

सुब्ह ! क़ुर्बान तेरे चेहरे पर
रात कितने उदास थे हम लोग

जिनका सूझा न कुछ जवाब हमें
उन सवालों पे हँस दिए हम लोग

अब भी प्यारी हैं बेड़ियां हमको
हैं न जाहिल पढ़े-लिखे हम लोग

अब के हारे तो टूट जाएँगे
जीत जाएँ ख़ुदा करे हम लोग