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काँपत गात सकात बतात है साँकरी खोरि निशा अँधियारी / बोधा

काँपत गात सकात बतात है साँकरी खोरि निशा अँधियारी ।
पातहू के खरके छरकै धरकै उर लाय रहै सुकुमारी ।
बीच मे बोधा रचै रस रीति मनौ जग जीति चुक्यो तेँहि बारी ।
योँ दुरि केलि करै जग मेँ नर धन्य वहै धनि है वह नारी ।


बोधा का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल मेहरोत्रा के संग्रह से उपलब्ध हुआ है।