भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कामरेड, मैं तुम से प्यार करती हूं / निशांत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

उस दिन
तुम्हारे चेहरे पर उदासी थी,
कामरेड.

आज भी
वही उदासी
मुझे तुम्हारे नजदीक
लाती है.

मैंने हमेशा
उदास लोगों को देखा है
अपने आस-पास
पर तुम्हारी उदासी
गोबर से लिप दिए हुए
हमारे गांव के
उस बड़े से घर की तरह
है
सुंदर और बड़ा घर
खाली घर
सायं-सायं करता हुआ
एक नया घर
सुंदरता मेरे पास भी है
पर उदासी उससे हजार-हजार गुनी ज्यादा
जबकि लोग कहते हैं- ‘मैं
बहुत बातूनी हूं.
चुप नहीं रह सकती एक
भी मिनट.’

तुम्हारे जवान चेहरे पर
उदासी
एक धीर गंभीर परिपक्व
प्रौढ़ युवा की तरह
साथ-साथ रहती है
और तुम्हारी आंखंे
दो कुओं की तरह पाताल
से खींच कर लाती है
करुणा
समुद्र सी पर पीली
करुणा
एक हिम्मत सी मुस्कान
के साथ

कैसे हो?
कहां से हो?
नाम क्या है तुम्हारा?
ये सब बेमानी हो गया
था
जब तुम कहे थे- नाम
में क्या रखा है?
और उतर गए थे बस
से एक मिनट ही बाद

कितने दिन
कितने साल
कितनी सदियां बीती
फिर तुम मिले
तुम्हारी पहचान मिली
मिली वही उदासी
जो तुम्हारा स्थायी भाव था

मैं
पिता से प्यार नहीं करती
मां से भी नहीं
किताबों से करती हूं
कविताओं से करती हूं
और पढ़ना मुझे
यात्रा करने जैसा आनंददायक लगता है

तुम ह्वेनसांग को जानते हो
तुम रूस को जानते हो
तुम इतिहास-भू-गोल
और संसार को जानते हो
तुम कितने-कितने लोगों
को जानते हो
तुम कितने-कितने लोगों
से अच्छे से मिलते हो
तुम कितने-कितने लोगों
के नजदीक रहकर भी
दूर हो
तुम आंखों में कितनी-
कितनी बातें छिपाये हो

मुझे तुम से प्यार हो गया
है.
मैं तुम से छह साल छोटी
हूं.
तुम्हारी भांजी और
भतीजी मेरी जितनी बड़ी है.
तुम्हारी आंखें कितनी
पवित्र और भोली हंै.
तुम से मैं कितना डरती हूं.
तुम्हारा सम्मान भी
करती हूं.
तुम्हारी भांजी और
भतीजी की तरह झगड़ा
भी करती हूं.

तुम्हारी कविताओं वाली
पत्रिकाएं भी पढ़ती हूं
उन पर बहस करती हूं
तुम्हारे कामों में हाथ
बंटाती हूं
सुझाव देती हूं
पर तुम से कैसे कहूं,
कामरेड.
जबकि दुनिया की तमाम
बातें करती हूं तुम से
उस वक्त तुम्हारी आंखें मुझे
दुनिया में सब
से खूबसूरत और प्यारी
लगती हंै

मैं किसी से नहीं डरती
पिता से नहीं
मां से नहीं
भाई और चाचा से नहीं
किसी से भी नहीं
तुम से भी नहीं

तुम भगवान को नहीं मानते
मैं भी नहीं मानती
(मैं तुम्हें मानती हूं)

तुम्हारे इतनी नजदीक हूं
कि हाथ बढ़ाऊं तो
मुट्ठी में बंद कर लूं तुम्हें
पर मैं भी अजीब हूं
अजीब हूं बोलकर ही
तुम्हारे करीब हूं
करीब हूं बोलकर यह बोल नहीं पाती
इसलिए आज यह पत्र
लिखकर कहती हूं-
कामरेड, मैं तुम से प्यार
करती हूं.