भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कारी बदरिया ऊनई अरे तै जिन बरसो हो / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कारी बदरिया ऊनई अरे तै जिन बरसो हो।
माथे अजुल जू कै सैरो अरे तैं जिन बरसो हो।
माथे बबुलजू के सैरो अरे तैं जिन भिजावैं हो।
माथे काकुल जू के सैरो अरे तैं जिन भिजावैं हो।
कारी बदरिया ऊनई अरे तैं जिन बरसो हो।
माथे दूल्हा राजा के सैरों तू जिन भिजावैं हो।