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कालीबंगा: कुछ चित्र-2 / ओम पुरोहित ‘कागद’

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आज फिर
जम कर हुई
बारिश
 
पानी की चली
लहरें
कालीबंगा की गलियों में

लेकिन नहीं आया
भाग कर
कोई बच्चा
हाथों में लेकर
काग़ज़ की नाव
हवा ही लाई उड़ाकर
एक पन्ना अख़बार का

थेहड़ को मिल गया
मानवी स्पर्श।


राजस्थानी से अनुवाद : मदन गोपाल लढ़ा