भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कालोनी के लोग / योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अपठनीय हस्ताक्षर जैसे
कालोनी के लोग !

संबंधों में शंकाओं का
पौधारोपण है
केवल अपनों में ही अपना
पूर्ण समर्पण है

एकाकीपन के स्वर जैसे
कालोनी के लोग !

महानगर की दौड़-धूप में
उलझ ख़ुशहाली
जैसे ग़मलों में ही सिमटी
जग की हरियाली

गुमसुम ढाई आखर जैसे
कालोनी के लोग !

ओढ़े हुए मुखों पर अपने
नकली मुस्कानें
यहाँ आधुनिकता की बदलें
पल-पल पहचानें

नहीं मिले संवत्सर जैसे
कालोनी के लोग !