भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कितना भला होता रेगिस्तान / अमित कल्ला

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

थाम लेती हैं उंगलियाँ
पानी की
रंगों से भरी
गाथाएं

रामभरोसे ही सही
कोरती उड़ते पंख
आसमान के,
बातचीत की बिसातों पर
अक्षरों की बुनाई से
छूटे अजनबी रेशे
मनमानी
सुधि जगाते हैं

आख़िर
कितना भला होता
रेगिस्तान
अपने बिछोने पर
यात्राओं के
रूखे पगों को
नम करता

गहरे - गहरे
साजों की संगत का
अर्ध्य देता है ।