Last modified on 13 अप्रैल 2013, at 12:14

किरण की छन्नी में बन्ने ने रास रचाई / हिन्दी लोकगीत

किरण की छन्नी में बन्ने ने रास रचाई

बन्नी मैं तो देखूंगा तू कितनी सुन्दर आई

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बन्नी मैं तो देखूंगा तू कितनी पढ़ी लिखी आई
बन्ना जी मुझको क्या देखो
थारी दादी से ज्यादा सुन्दर आयी
बन्ना जी मुझको क्या देखो
थारी ताई से ज्यादा पढ़ी लिखी आयी।

किरण की छन्नी में बन्ने ने रास रचाई

बन्नी मैं तो देखूंगा तू कितनी सुन्दर आई
बन्नी मैं तो देखूंगा तू कितनी पढ़ी लिखी आई
बन्ना जी मुझको क्या देखो
थारी मम्मी से ज्यादा सुन्दर आयी
बन्ना जी मुझको क्या देखो
थारी चाची से ज्यादा पढ़ी लिखी आयी।

किरण की छन्नी में बन्ने ने रास रचाई

बन्नी मैं तो देखूंगा तू कितनी सुन्दर आई
बन्नी मैं तो देखूंगा तू कितनी पढ़ी लिखी आई
बन्ना जी मुझको क्या देखो
थारी बुआ से ज्यादा सुन्दर आयी
बन्ना जी मुझको क्या देखो
थारी मौसी से ज्यादा पढ़ी लिखी आयी।

किरण की छन्नी में बन्ने ने रास रचाई