भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

किसान मजदूर आंदोलन जिंदाबाद / रणवीर सिंह दहिया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गरीब और गरीब होग्या इसा तरीक़ा महारे विकास का॥
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का॥
1
कहते ग़रीबी दूर करांगे कई नई स्कीम चलाई गई
विकेंद्रीकरण कर दिया देखो बात ख़ूब फैलाई गई
सल्फास किसान क्यों खावै के कारण सत्यानाश का॥
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का॥
2
नाबरॉबरी और कितनी या भारत मैं बधांते जावांगे
भगत सिंह के सपन्याँ का समाजवाद कद ल्यावांगे
छल कपट छाग्या देश मैं के होगा भ्रष्टाचारी घास का॥
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का॥
3
माणस अपणा आप्पा भूल गया पीस्से का आज दास हुया
बेईमानी बढ़ती जावै सै बाज़ार का दबाव आज ख़ास हुया
स्कॉच चलै पांच सितारा मैं ख़्याल ना म्हारी प्यास का॥
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का॥
4
प्यार की जगां हवस छागी नँगे होवण की होड़ लगी रै
शरीर बेचकै एश करो सडकां पै या दौड़ लगी रै
रणबीर सिंह बरोने आला साथ निभावै सोहनदास का॥
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का॥