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की सखि, साजन? / भाग - 11 / दिनेश बाबा

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101.

तेवर जेकरोॅ बहुत कड़ा छै,
जस सें भरलोॅ जना घड़ा छै,
जेकरा नीक लगै, आराधक,
की सखि ‘गुरू’?
नैं, संपादक।

102.

वरूण देव के कृपा सें आबै,
धरा धाम क, जें सरसाबै,
आबै ढोल बजैले माँदल,
की सखि दुलहा?
नैं सखि, बादल।

103.

माय, बहिन, बाबा, महतारी,
सब कन्हा पर एक सबारी,
जाय छै एक दिशा हरदम,
की सखि चींटी?
नैं, बोलबम।

104.

बेर-बखत, असनान कराबै,
कभी, दिशा-मैदान कराबै,
लगै अनुज गगरी के छोटा,
की सखि चुकिया?
नैं सखि, लोटा।

105.

वीरोॅ के शृंगार छेकै जे,
रक्षक के हथियार छेकै जे,
अरि पर छप-छप करै प्रहार,
की सखि भाला?
नैं, तलवार।

106.

गोड़ोॅ सें लतियाबै सभ्भे,
ताली मतर बजाबै सभ्भे,
जबेॅ भी कोनो होय छै गोल,
की सखि हॉकी?
नैं फुटबोल।

107.

जहाँ भी जाय छै लाते खाय छै,
तभियो चर्चा खूब कराय छै,
छै करतब जेकरोॅ अनमोल,
की सखि जुत्ता?
नैं, फुटबोल।

108.

सब में लगै सुखौती, जहिया,
धूरा खूब उड़ाबै, पहिया,
लगै जरी सब होयतै राख,
की सखि आगिन?
नैं, बैसाख।

109.

जहाँ-तहाँ होय भरलोॅ घर में,
बक्सा, पेटी, कोठी तर में,
घीन लगै मन होय छै खट्टा,
की सखि चींच?
नैं, तेलचट्टा।

110.

घर, दफ्तर, अलमारी लागै,
होकरो जबेॅ बेमारी लागै,
कपड़ा, कागज करै बेकार,
की सखि दीमक?
नैं, ओसरार।