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की सखि, साजन? / भाग - 5 / दिनेश बाबा

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41.

नाम अदब सें लेलोॅ जाय छै,
मतर प्रदूषित भेलो जाय छै,
तभियो दै छै सभे दुहाय,
की सखि ‘धरम’?
नैं सखि, न्याय।

42.

जोर जबरिया आबै छै जे,
धरम, ईमान नसाबै छै जे,
जें बलात छिनबाबै टाका,
की सखि ठग?
नैं सखि, डाका।

43.

जें एक्के लाठी सें हाँकै,
पद मर्यादा आपनोॅ टाँकै,
मतर कलम जेकरो आह्लादक,
की सखि लेखक?
नैं, सम्पादक।

44.

खिस्सा आरू कहानी कहथौं,
बीतल अपन जुवानी कहथौं,
कामें करी क जौनें खाय,
की सखि नौकर?
नैं सखि, दाय।

45.

कपड़ा फींचै छै पाटोॅ पर,
जिनगी भर एक्के घाटोॅ पर,
घाम चुआय क होय छै सर्द,
की सखि धोबी?
नैं सखि, मर्द।

46.

बान्हलो घाट पिलाबै पानी,
मतर कि राखै छै गोड़छानी,
भर जिनगी नै रहै छै डोॅर,
की सखि पोखर?
नैं सखि, घोॅर।

47.

जिनगी के पहचान छिकै जे,
पुरूष लेली वरदान छिकै जे,
साथे पार करै बैतरनी,
की सखि पौरूष?
नैं सखि, घरनी।

48.

बरतन-बासन पोंछा पानी,
यही ना बीतै जेकर जुआनी,
टोला भरी के बात बताय,
की सखि दादी?
नैं सखि, दाय।

49.

जे देखी सब्भे ललचाबै,
चुम्बक जुगना सटलोॅ आबै,
मजा भी दै जौनें भरपूर,
की सखि नारी?
नैं सखि घूर।

50.

सब चाहै असकेल्लो पाबौं,
अपने रागोॅ तर घुसियाबौं,
जेकरोॅ एक विकल्प षोड़सी,
की सखि औरत?
नैं सखि, बोरसी।