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कुकर्म करे मानव पावत है नाना दुःख / शिवदीन राम जोशी

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कुकर्म करे मानव पावत है नाना दुःख,
सुकर्म के करे ते सुख मिलता नर घनेरा है।
तीरथ पुन्य दानन से करता सनमान सत्य,
धन्य धन्य मानव यही भाग्य का सवेरा है।
करता सतसंग संग, भक्ति का चढाय रंग,
राम नाम लेने से भागे भ्रम अंधेरा है।
कहता शिवदीन राम मिलता विश्राम राम,
सतगुरु का लाल बने चरणन का चेरा है।