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कुर्सी के खेल / मथुरा नाथ सिंह 'रानीपुरी'

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देखोॅ ई कुर्सी केॅ खेल
कुर्सी-कुर्सी ठेलम-ठेल॥

ई कुर्सी केॅ देखोॅ करामत
जखनी-तखनी होय कयामत
बिन पटरी आरोॅ पहिया के
दौड़ावै छै सगरो रेल॥

कुर्सी में कुर्सी केॅ काँटोॅ
कुर्सी से कुर्सी केॅ डाँटोॅ
कुर्सी केॅ कुर्सी ललकारै
कुर्सी दै छै कुर्सी जेल॥

कुर्सी में हरदम्मे हलचल
एक दोसरा केॅ बोलै चल-चल
मार करै कुर्सी-कुर्सी सें
कुर्सी करै छै कुर्सी फेल॥

ई कुर्सी सें कुर्सी डोलै
केकड़ा बिच्छोॅ सभ्भे बोलै
करो प्रयास कुर्सी नै डोलै
कुर्सी सें नै करिहोॅ खेल

-प्रकाशित, अंग माधुरी, पटना।