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कूर कूरकुट को कोठरी / प्रवीणराय

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कूर कूरकुट को कोठरी निवारि राखौं,
चुनि दै चिरैयन का मूँदि राखौं जलियो।
सारँग में सारंग सुनाइ के 'प्रवीन' बीना,
सारंग दै सारंग की जोति करौं थलियो॥
बैठि परयंक पै निसंक ह्वैकै अंक भरौं,
करौंगी अधर पान मैन मत मिलिको।
मोहिं मिलैं इन्द्रजीत धीरज नरिन्दराय,
एहो चंद! आज नेकु मंद गति चलियो॥