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केकरा सोभे लाल लाल पगिया / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

केकरा सोभे लाल लाल पगिया, केकरा सोभे मटुकिया।
देखु देखु हे सखिया, दुलहा ऐलै बरियतिया॥1॥
आगु आगु आबै छै दुलहा बाबू, तहिं पाछू आबै बरियतिया।
देखो देखो हे सखिया॥2॥
‘हूँ हूँ’ करै कहरिया आबै, आगु आगु रँगे रबाइसी[1]
तहिं पाछु छूटे पड़किया[2], देखो देखो हे सखिया॥3॥

शब्दार्थ
  1. आतिशबाजी
  2. पटाखे