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केकर बजले तुरहिया, केकर करताल / भोजपुरी

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केकर बजले तुरहिया, केकर करताल,
केकर बजले घउसवा, लोग होखू न सहाय।
गोरख के बजले तुरहिया, फिरंगी के करताल,
नेपलवा के बजले घउसवा, लोग भइले समतूल।।१।।
नेपालहीं से राजा नामे हेठउड़ा भइले ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।।२।।
पूरुब देस चिट्ठी भेजे, भेजेला बड़ी दूर,
जवने देसे रउता फनइतववा, तहाँ चिठिया भेजाई।
झरेला रउता फनइतवा, गढ़ भइ गइे ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।।३।।
पछिम देस चिट्ठी भेजे, भेजेला बड़ी दूर,
जवने देसे फिरंगी पचास, तहाँ चिठिया भेजाई।
झरेला फिरंगी पचास. गढ़ भइ गइले ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।।४।।
उत्तर देस चिट्ठी भेजी, भेजेला बड़ी दूर,
जवने देसे भोटिया पचास, तहाँ चिठिया भेजाई।
झरेला भोटिया पचास गढ़ भइ गइले ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।।५।।
दखिन देस चिट्ठि भेजे, भेलेला बड़ी दूर,
जाही देसवा गोरखा पचास, तहाँ चिठिया भेजाई।
झरेला गोरखा पचास, गढ़ भइ गइले ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।।६।।
उहवाँ ही से राजा नामे हेठउड़ा भइले ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।
हाथिन खम्हा गड़ावे, उहवाँहीं धूम मचावे,
लोग भइले समतूल।।७।।
उहवाँ कहीं से राजा नामे त्रिवेनी भइले ठाढ़,
हाथिन खम्हा गड़ावे, तमुआ देले तान।।८।।
जेकरहीं लवठी दुलहिया, से हो घरे फिरी जाय,
बइठे के मिलिहें पिरहिया, भोगिहें गुआ-पान,
खइबों दरही मछरिया, झीनवाँ के भात,
पीअबों लरइनी के पनिया, हो लड़ब छव मास।।९।।
पहिले लड़ल जस हमिला, तस हरदी जेवान,
घोड़वा के लगले बनूखिया, दल भइले जयकार।।१0।।
दूसरे लड़ल जस तेगवा, तस हरदी जेवान,
जस देहो आषाढ़ के बिजुलिया, तेगा चमकत जाय।।११।।
तीसरे लड़ल जस तीरवा, त हरदी जेवान,
जस देखों भादो के बुनिया, तीर बरसत जाय।।१२।।
चउथे लड़ल जस तोपवा, तस हरदी जेवान,
जस देखों माघ के कुहेरवा, धूइयाँ छपइत जाय।।१३।।
मचिया बइठल रउताइन, बोले हँसीकर बात,
कवन-कवन रइया जूझल, मोरे सामी के पास।
हाथी पीठी जूझे महाउत, घोड़ा सबुजी ओहार,
तेकरे पीछे जूझले टोडरमल, पीछे सानी तोहार।।१४।।
ठगवा के लगले लबदिया, सरजुगवा के तीर,
भजना के टूटले टंगरिया, सरजुगवा के तीर।
जीतलों में फुटवल तापा, गढ़ कइलों उजाड़
तवन-तवन रइया जुझल, तोरे सामी के पास।।१५।।