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केहू-केहू का होखे राम नाम के चरचा / मास्टर अजीज

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केहू-केहू का होखे राम नाम के चरचा
कहीं-कहीं चढ़ल बाटे घरे-घरे घरे-चरचा,

केहू-केहू का, जोड़ाता रात-दिन के खरचा।
घोंसरिये में निकलल बा घर-घर के लरछा,
केहू-केहू का, निकले आपसे में बरछा।

गाँवे-गाँवे बाँटल जाला खेतवे के परचा,

केहू-केहू का, मिले पिये के ना तरछा।
पूरबी का चूक से सोहात नइखे चरचा,

केहू-केहू का, जइसे धूकल जाला मरिचा।
‘मास्टर अजीज’ गावस रामनाम के चरचा,
केहू-केहू का, फाटल मिलत नइखे गमछा।