भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कोई उसके बराबर हो गया है / विकास शर्मा 'राज़'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कोई उसके बराबर हो गया है
ये सुनते ही वो पत्थर हो गया है

जुदाई का हमें इम्कान तो था
मगर अब दिन मुक़र्रर हो गया है

सभी हैरत से मुझको तक रहे हैं
ये क्या तहरीर मुझ पर हो गया है

असर है ये हमारी दस्तकों का
जहाँ दीवार थी दर हो गया है

बहुत ख़ुश हूँ उसे बेचैन कर के
हिसाब उससे बराबर हो गया है