भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कोई कहियौ रे प्रभु आवनकी / मीराबाई

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कोई कहियौ रे प्रभु आवनकी
आवनकी मनभावन की।

आप न आवै लिख नहिं भेजै
बाण पड़ी ललचावनकी।

ए दो नैण कह्यो नहिं मानै
नदियां बहै जैसे सावन की।

कहा करूं कछु नहिं बस मेरो
पांख नहीं उड़ जावनकी।

मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे
चेरी भै हूं तेरे दांवनकी।