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कोई बिस्तर नया सा / नसीम अजमल

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मनचंदा बानी के नाम

कोई बिस्तर नया सा ।
कि अब हो घर नया सा ।

नए से फूल लब पर
दिलों में डर नया सा ।

नई सी एक उलझन
सरों में शर[1] नया सा ।

नई सी कोई आँधी
कोई लश्कर नया सा ।

उतारो मेरे दिल में
कोई खंजर नया सा ।

यही वो आदमी है
मगर है सर नया सा ।

दिखाए अब तमाशा
वो बाज़ीगर नया सा ।

यकायक ये हुआ क्या
हर इक मंज़र नया सा ।

नया सा फूल मुखड़ा
परी पैकर[2] नया सा ।

नई सी सारी रस्में
ज़र-ओ-ज़ेवर नया सा ।

सजा दे चाँद कोई
सर-ए-बिस्तर नया सा ।

अरे ओ शाम-ए-फुरक़त[3]
कोई पत्थर नया सा ।

लगा था वो भी 'अजमल'
बस इक पल भर नया सा ।

शब्दार्थ
  1. फ़साद
  2. परी का रूप
  3. विरह की शाम