भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

कोन राय बोवय जोंधरी, मऽरोऽ साँवरिया ओ / पँवारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

कोन राय बोवय जोंधरी, मऽरोऽ साँवरिया ओ
कोन दारी राखन जाय मऽरीऽ साँवरिया ओ
भैय्या राय बोवय जोन्धरी मऽरोऽ साँवरिया हो
समदन दारी राखन जाय मऽरीऽ साँवरिया ओ
अच्छी राखजो जोंधरी मऽरी साँवरिया ओ
चिड़िया चुन-चुन खाय मऽरीऽ साँवरिया ओ
चिड़िया चुन-चुन खाय मऽरीऽ साँवरिया ओ
अच्छी मारजो गोफन मऽरीऽ साँवरिया ओ
चिड़िया उड़-उड़ जाय।
असीऽ फेरजो गोफन, मऽरीऽ साँवरिया ओ
गोफन गरज-गरज रह्य जाय मऽरी साँवरिया ओ
गोफन गरज-गरज रह्य जाय मऽरी साँवरिया ओ।।
कोन दारी राखन जाय, मऽरी साँवरिया ओ
कोन राय बोवय जोंधरी, मऽरी साँवरिया ओ।।