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कोरे कोरे कागज मँगाओ राजा बाबुल / बुन्देली

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कोरे कोरे कागज मँगाओ राजा बाबुल
सो सुध बुध लगुन लिखाओ हो रम्मा।
सुरन गौ को गोबर मँगाओ राजा बाबुल
सो ढिक धर अँगन लिपाओ हो रम्मा।
गज मोतिन के चौक पुराओ राजा बाबुल
सो कंचन कलश धराओ हो रम्मा।
चंदन पटरी डराओ राजा बाबुल
सो अमृत अरग दिबाऔ हो रम्मा।
पाँच सुपारी हरदी की गाँठें राजा बाबुल
सो मुहर अढ़ाई डराओ हो रम्मा।
सुरन गौ कौ गोबर न पूजै मोरी बेटी।
सो गौआ कौ गोबर मँगाओ हो रम्मा।
गज मोतिन के चौक न पूजै मोरी बेटी
सो चून के चौक पुराओ हो रम्मा।
कंचन चौक न पूजै मोरी बेटी
सो माटी के कलश धराओ हो रम्मा।
चंदन पटरी न पूजै मोरी बेटी
सो छेवले की पटरी डराओ हो रम्मा।
अमृत अरग न पूजै मोरी बेटी
सो गंगाजल अरग दिवाऔ हो रम्मा।
सोने की मोहरें न पूजै मोरी बेटी।
सो रूप रूपैया डराओ हो रम्मा।