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कोसी अँचल में बाढ़ (2008)-5 / मुसाफ़िर बैठा

अभी के सबसे बड़बोले बड़नाम
भारतीय योगगुरु के यश को भुनाकर
अपने माल के विज्ञापन का मौका आया ताड़
एक अवसरवादी पटनिया स्वयंसेवी संस्था ने
बाढ़ राहत में अपनी भूमिका को
गुरुत्व प्रदान करने की सोची
 
अपनी मदद की पहली खेप को
राहतपाइयों तक पहुंचाने के लिए
संस्था ने गुरु की शोहरत को सीढ़ी बनाई
राहत की ट्रक को झंडी दिखाने हेतु
गुरु हरिद्वार के योगमहल से वायुमार्ग से बुलाए गए
वे सारी तैयारियों के दो दिन बाद आए

राहत रवानगी की खातिर
पंडित के पतरे में यही शुभ मुहूर्त का
योग निकला था
शुक्र था या कि भाग्य राहतायाचकों का
कि यह दिन जल्दी ही आ गया था

इस तरह राहतपाइयों तक
राहत सामग्री पहुंची काफी देर से
और संस्था को मीडिया कवरेज मिले ढेर से

योग करने पर पता चला कि
संस्था ने राहत मद में जितना खर्च किया
उस से कहीं बेसी खर्च हुआ
आगत योगगुरु के स्वागत पर

21.9.08