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कौने मोर पोखरी खोनाबे / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

कौने मोर पोखरी खोनाबे[1], कौने मोर पुरैनी[2] रोपल हे।
असहें[3] बेसहें[4] गेलअ[5] हे॥1॥
राम मोर पोखरी खोनाबे, सीता मोर पुरैनी रोपल हे।
असहें बसहें गेलअ हे॥2॥
ओहि पोखरी लहाबे[6] गेलअ, कवन भाई।
असहें बसहें गेलअ हे॥3॥

शब्दार्थ
  1. खुदवाया
  2. पुरइन; कमल का पत्ता
  3. ऐसे ही
  4. खरीदने
  5. गया
  6. स्नान करने