भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

क्या मिला क्या ना मिला, चलता रहा / सिया सचदेव

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

क्या मिला क्या ना मिला, चलता रहा
ज़िन्दगी का सिलसिला चलता रहा

हम तो थक कर रुक गए कुछ गाम ही
हाँ ! मगर वो काफिला चलता रहा

चाहकर भी हम तेरे न हो सके
दरमियां इक फासिला चलता रहा

हमसफ़र इक राह के हम-तुम हैं क्यूं
मन ही मन शिकवा -गिला चलता रहा

जब वो मुरझाया सिया यूँ हो गया
फ़ूल जब तक था खिला चलता रहा