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क्या मुझे बस्तर पर रोना चाहिए ? / संजय अलंग

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क्या मुझे बस्तर पर रोना चाहिए?
क्योंकि वनवासीयों के पास जमीन और वन नहीं रहे
क्योंकि वे अभी भी नंगे रह रहे हैं
क्योंकि उन्हे भागने से रोकने को जुड़ूम में बन्द कर दिया गया है
क्योंकि उन्हे मारने को लोग आ गए हैं
क्योकि बम, सुरंगे, बन्दूक उनके मुँह में ठूंस दी गई हैं
क्योंकि जिन्दा लोगों से जीवन निकाल दिया गया है
क्योंकि स्थानीय बल पंगु हो पलायन कर गए है
छोड़ कर शिविरों में भात खाते वनवासियों को
जहाँ बाहर से आए मरते सैनिक मूत रहे हैं
क्योंकि लोग जंगली हैं
क्योंकि धर्म प्रचारक भी धर्म भूल गए हैं
क्योंकि ऊपर से झाँक कर
उन पर रोना ही सुख है
पर वे तो हँस रहे हैं
तब भी क्या मुझे रोना चाहिए?