खत्म हुआ तारों का राग
जाग मुसाफ़िर अब तो जाग
धूप की जलती तानों से
दश्ते-फ़लक में लग गई आग
दिल का सुनहरा नग़मा सुनकर
अबलक़े-शब ने मोड़ी बाग
कलियाँ झुलसी जाती है
सूरज फैंक रहा है आग
ये नगरी अंधियारी है
इस नगरी से जल्दी भाग।
खत्म हुआ तारों का राग
जाग मुसाफ़िर अब तो जाग
धूप की जलती तानों से
दश्ते-फ़लक में लग गई आग
दिल का सुनहरा नग़मा सुनकर
अबलक़े-शब ने मोड़ी बाग
कलियाँ झुलसी जाती है
सूरज फैंक रहा है आग
ये नगरी अंधियारी है
इस नगरी से जल्दी भाग।