खरी सासु घरी न छमा करिहैं, निसिबासर त्रासन हीं मरबी।
सदा भौंहे चरहै ननदी, यों जेठानी की तीखी सुनै जरबी॥
'कवि बोधा न संग तिहारो चहैं, यह नाहक नेक फँदा परबी।
बऑंखें तिहारी लगैं ये लली, लगि जैहें कँ तो कहा करबी॥
खरी सासु घरी न छमा करिहैं, निसिबासर त्रासन हीं मरबी।
सदा भौंहे चरहै ननदी, यों जेठानी की तीखी सुनै जरबी॥
'कवि बोधा न संग तिहारो चहैं, यह नाहक नेक फँदा परबी।
बऑंखें तिहारी लगैं ये लली, लगि जैहें कँ तो कहा करबी॥