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ख़त आ चुका, मुझसे है वही ढंग अब तलक / सौदा

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ख़त आ चुका, मुझसे है वही ढंग अब तलक
वैसा ही मिरे नाम से है नंग[1] अब तलक

देखे है मुझको अपनी गली में तो फिर मुझे
वैसी ही गालियाँ हैं, वही संग[2] अब तलक

आलम से की है सुलह मगर एक मेरे साथ
झगड़े वही अबस[3] के , वही जंग अब तलक

सुनता है जिस जगह वो मिरा ज़िक्र एक बार
भागे है वाँ[4] से लाख ही फ़रसंग[5]अब तलक

'सौदा' निकल चुका है वो हंगामे-नाज़[6] से
पर मुझसे है अदा का वही रंग अब तलक

शब्दार्थ
  1. शर्म
  2. पत्थर
  3. व्यर्थ
  4. वहाँ
  5. दूरी की एक इकाई
  6. नखरे के दौर से