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ख़ुदा की दी हुई नेमतें / नज़ीर अकबराबादी

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यह नेंमतें अयां<ref>प्रकट</ref> हैं जा आलम के वास्ते।
हैंगी यह सब मियां! इसी आदम के वास्ते।
कुछ तन के वास्ते हैं कुछ शिकम<ref>पेट</ref> के वास्ते।
है बेश-बेश के लिए, कम-कम के वास्ते।
सब खू़बियां बनी हैं, यह आदम के वास्ते॥
और दम बना है आह! फ़क़त ग़म के वास्ते॥1॥

महबूब गुलइज़ार<ref>गुलाब जैसे सुकुमार और कोमल गालों वाला</ref>, परी ज़ाद<ref>परियों की औलाद, अप्सरा पुत्र</ref> सुर्ख फ़ाम<ref>जिसके शरीर का रंग लाल हो, रक्तांग</ref>।
मुतरिब<ref>गायक</ref>, शराब, साक़ियो मीना<ref>शराब का जग</ref>, सुराही जाम।
नाज़ो अदाओ चोचले दौलत की धूमधाम।
हस्ती निशातो<ref>खुशी</ref> इश्रतो<ref>भोग विलास का सुख</ref>, ऐशो तरब<ref>भोग विलास का आनन्द</ref> मुदाम<ref>सदैव</ref>।
सब खू़बियां बनी हैं, यह आदम के वास्ते॥
और दम बना है आह! फ़क़त ग़म के वास्ते॥2॥

असबाब इश्रतों के हैं जितने जहाँ तहां।
गुलदान, पानदान, इत्रदान ज़र फ़िशां<ref>सोना बरसाने वाला</ref>।
हुक्के भरे चमकते हैं, और नैचे पेंचवां<ref>पेचदार</ref>।
मुश्को<ref>कस्तूरी</ref>, गुलाबो, इत्रों, चमन, बाग़ो वोस्तां<ref>उद्यान, बाग</ref>।
सब खू़बियां बनी हैं, यह आदम के वास्ते॥
और दम बना है आह! फ़क़त ग़म के वास्ते॥3॥

जितने जवाहिरात हैं सुर्ख़ो सफे़दो, लाल।
याकू़त<ref>एक प्रसिद्ध रत्न</ref> लाल, यमनियो<ref>यमन सम्बन्धी</ref> नीलम फ़लक मिसाल<ref>आसमान जैसा</ref>।
फ़ीरोज़ा<ref>हरित मणि</ref> मूंगा, मोतियो पुखराज ख़ुश खि़साल<ref>खुश करने वाले स्वभाव के</ref>।
ज़र सीम, फ़ोज, हश्मतो<ref>सम्मान</ref> इमलाक<ref>किसी को किसी वस्तु का स्वामी बनना, स्वामित्व</ref>, गंजो माल।
सब खू़बियां बनी हैं, यह आदम के वास्ते॥
और दम बना है आह! फ़क़त ग़म के वास्ते॥4॥

मेवे हैं जितने खुश्को तर इस बाग़ में लगे।
बादाम, पिस्ते, दाख, छुहारे व खेंपरे।
ख़रबूजे, आम, जामनो, लीमूं चकोतरे।
नारंगियो, अनार वही, केले संगतरे।
सब खू़बियां बनी हैं, यह आदम के वास्ते॥
और दम बना है आह! फ़क़त ग़म के वास्ते॥5॥

दुनियां में जितने लोग हैं, क्या शाह क्या फ़कीर।
सब सुख में हैं, पर एक न एक दुःख में है असीर<ref>कै़दी, बन्दी</ref>।
क्या इश्रतें बहार की, क्या ऐश दिल पज़ीर<ref>रुचिकर, दिलपसंद</ref>।
जिन जिन का तुमने नाम लिया अब मियां ”नज़ीर“।
सब खू़बियां बनी हैं, यह आदम के वास्ते॥
और दम बना है आह! फ़क़त ग़म के वास्ते॥6॥

शब्दार्थ
<references/>