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ख़ुद को मिस्ले-हुबाब देखो तुम / रामश्याम 'हसीन'

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ख़ुद को मिस्ले-हुबाब देखो तुम
वर्ना होगे ख़राब देखो तुम

पहले कमियों को अपनी पहचानो
होगे फिर कामयाब देखो तुम

इसका हर बाब पढ़ने वाला है
पढ़के दिल की किताब देखो तुम

ऐसे ख़ामोश रहना धोखा है
कुछ तो दे दो जवाब देखो तुम

ख़्वाब बन जाएगा हक़ीक़त, गर
दिल की आँखों से ख़्वाब देखो तुम