भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ख़ुशी / ईमान मर्सल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: ईमान मर्सल  » ख़ुशी

मैं उस स्ट्रेचर पर भरोसा करती हूं
जिसे दो लोग खींच रहे
मरीज़ के कोमा में इससे कुछ तो रुकावट पड़ती होगी.
इस दृश्य को जो भी देख रहे उनकी आंखों की हमदर्दी पर मुझे संदेह है.

मैं मछुआरे का सम्मान करती हूं
क्योंकि एक अकेला वही है जो मछली को समझता है.
मारे चिढ़ के उसका तराज़ू मैं छीन लेती हूं फिर.

मुझमें इतना सब्र नहीं कि मैं समंदर के बारे में सोचती बैठूं
जबकि मेरी उंगलियां पैलेट पर लगे रंगों में डूबी हुई हैं

जिस क्षण मैं जागती हूं
मेरी आत्मा का रंग काला होता है

पिछली रात के सपनों में से मुझे कुछ भी याद नहीं सिवाय इसके
कि एक इच्छा है कि
उस कड़ी के वस्तुनिष्ठ इतिहास को जान सकूं
जो असीम आनंद और अंधकार को जोड़ती है
जो जोड़ती है अंधकार और आतंक को
जो जोड़ती है आतंक और जागने पर काली आत्मा का सामना होने को

देखा जाए तो ख़ुशी
भाप से चलने वाले बेलचों में रहती है
जो किसी क्रेन से जुड़े होते हैं.
प्यार के लायक़ तो सिर्फ़ वही हैं.
उनकी जीभ उनसे आगे-आगे चलती है
वे पृथ्वी की स्मृतियों को खोदते हैं पूरी तटस्थता से
उलट-पुलट करते हैं

अंग्रेजी से अनुवाद : गीत चतुर्वेदी