भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ख़्वाहिशें बे पनाह करने में / राज़िक़ अंसारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ख़्वाहिशें बे पनाह करने में
हम हैं ख़ुद को तबाह करने में

हमने कितने उसूल तोड़ दिए
एक तुझ से निबाह करने में

हम अदालत में केस हार गये
दोस्तों को गवाह करने में

कितनी लाशें बिछाई हैं तुमने
ख़ुद को आलम पनाह करने में

सारी बस्ती उजाड़ दी तुमने
मेरे घर को तबाह करने में