भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

खाकर रबड़ी, पीकर दूध / प्रकाश मनु

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मम्मी, मैं तो दूध पिऊँगा।
कल से गट-गट दूध पिऊँगा।
खाकर रबड़ी, पीकर दूध
मैं बन जाऊँगा तगड़ा,
रंबो-जंबो घबराएँगे
कौन करेगा मुझसे झगड़ा?
ढिशुम-ढिशुम हाथी से, कुश्ती
मैं शेरों के साथ लडूँगा!
बिल्लोपुर के किस्से में जो
एक बड़ा सा राक्षस है ना,
जाकर उससे खूब भिडूँगा।
इसीलिए तो दूध पिऊँगा!