मुझ से छूटे हुए साहिल की खुशामद न हुई,
मुझसे रूठी हुई मंजिल की खुशामद न हुई,
दर्द की गोद में कुछ और भी जी लेता मैं
पर मेरे दिल से ही क़ातिल की खुशामद न हुई।
मुझ से छूटे हुए साहिल की खुशामद न हुई,
मुझसे रूठी हुई मंजिल की खुशामद न हुई,
दर्द की गोद में कुछ और भी जी लेता मैं
पर मेरे दिल से ही क़ातिल की खुशामद न हुई।