भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गढ़ा सी आई गढ़ पाव्हनीन / पँवारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

गढ़ा सी आई गढ़ पाव्हनीन
वा गढ़ा सी आई गढ़ पाव्हनीन
ओका भैया खऽ लायो साथ, लल्ला
रात मऽ तारा रघु- मैल्या।
वा कसी चलय चाल, लल्ला
रात मऽ तारा रघु मैल्या।।
वा ठुमकत चलय चाल, लल्ला
रात मऽ तारा रघु मैल्या।।
तोरा कोन सा खसम को गाँव, लल्ला
रात मऽ तारा रघु मैल्या।।
ओका मुन्ना खसम को गाँव, लल्ला
रात मऽ तारा रघु मैल्या।।
ओकी थर-थर कापय पिण्डी
ओकी कमर लहुरिया लेय, लल्ला
रात मऽ तारा रघु- मैल्या।।
गढ़ा सी आई गढ़ पाव्हनीन
ओका भैया खऽ लायो साथ लल्ला
रात मऽ तारा रघु- मैल्या।।