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गढ़ माता को प्यारो, सुमन, सुमन सपूत ले / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

गढ़ माता को प्यारो, सुमन, सुमन सपूत ले।
अखोडू को कीच, सुमन, अखोडू को कीच,
ढंडक शुरु ह्वैगे, सुमन, रवाई का बीच।
घाघरी को फेर, सुमन, घाघरी को फेर,
गढ़माता की जिकुड़ी, सुमन, पैनो लागे तीर।
गढ़माता को वीर, सुमन, पैनो लागे तीर ले,
बजायो त धण, सुमन, बजायो त घण,
मरि जाण बल, सुमन, घर नी रण!
नौ लखो हार, सुमन, नौ लखो हार,
त्वैन शुरु कन्याले, सुमन, आजादी परचार!
गांधी जी का चेला, सुमन, आजादी परचार,
काटी जालो कुरो, सुमन, काटी जालो करो!
यो सुमन ढंडकी ह्वैगे, होई जाणो सूरो,
कपड़ा को गज, सुमन, कपड़ा को गज,
आँगण का बीच, सुमन झण्डा देन्द सज।
घास काटे सुमन, घास काटे च्वान,
तेरा साथी छन, सुमन, इसकूली ज्वान!
देवता का भोग, सुमन, देवता को भोग,
तेरा साथी छन, सुमन गौं गौं का लोग!
बाखुरी को कान, सुमन, बाखरी को कान,
सुफ्ल होइगे, सुमन, तेरो स्यो बलिदान!
गढ़माता को वीर सुमन, तेरो स्यो बलिदान!

शब्दार्थ