भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गणपति स्तुति / कमलानंद सिंह 'साहित्य सरोज'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जय जय विध्न हरन गननायक
गिरजा नन्दन शुभ वरदायक
सुरनर मुनि सों पुजित प्रथमहि सुभस सुभग के तुम अभिधायक।
सकल कलेश विनास करन हित तेरो नाम वन्यो है सायक।।
रिद्धि-सिद्धि सेवे निसिवासर तुअ गुण गरिमा के सब गायक।
सुमिरत ही फल पावत चारो अधहारी प्रभु त्रिभुवन नायक।।
हरि चरनन में भक्ति रहे नित कविता शक्ति बढे अतिलायक।
मांगत नाथ सरोज तेरो पद जानि तोहि निज परम सहायक।।